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कोनीचिवा जापान !

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दोस्तों! नमस्ते. बड़े दिनों बाद इस ब्लॉग पर अपने को पेश कर रहा हूँ. समय न निकाल पाने के लिये क्षमा चाहता हूँ. तो आज मैं बात करूंगा दिल्ली में हुये एक विशेष कार्यक्रम के बारे में. जैसा की आपको पता है कि ये साल भारत और जापान के दोस्ती के सत्तर साल के जश्न का साल है और इसीलिये पूरे भारत में तरह तरह के कार्यक्रम हो रहे हैं. इसी के तर्ज पर दिल्ली में भी ढेरों कार्यक्रम चल रहे हैं. आखिरकार देश कि राजधानी जो ठहरी. तो बात करते हैं बीते 18 और 19 नवम्बर को हुए "कोनीचिवा जापान" नामक कार्यक्रम के बारे में.  इस कार्यक्रम में हमने भी अपना श्रमदान दिया. और पूरा अनुभव बहुत ही विशेष रहा. इस कार्यक्रम के विशेष आकर्षक रहे कार्यक्रमों की सूची क्रमानुसार निम्न प्रकार के थे:

1-सूमो कुश्ती

2-ओकिनावा के सांस्कृतिक नृत्य

3- जापानी वाद्ययंत्र "कोतो" का प्रदर्शन

4- जापानी गायिका की गायिकी का प्रदर्शन

5- जापानी वाद्ययंत्र "ताइको" का प्रदर्शन

6-  कोसप्ले जापानी एनीमेशन "अनिमी" का प्रदर्शन

7- "उनदोकाई" में रस्साकसी

तो ये थे हमारे जापानी कलाकारों द्वारा प्रदर्शन. हम…

एक अध्याय खत्म हुआ

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18मई, 2017, मेरी परास्नातक की आखिरी परीक्षा समाप्त हो गयी. 20 मई, 2017, मैंने जापान फाउन्डेशन में अपने पहले बैच के छात्रों को प्रमाणपत्र सुपुर्द करके अलविदा बोला दिया. ये मेरे जापानी अध्यापक के रूप में पहला छात्रों का ज़खीरा था. तो कुल मिलाकर मेरा अध्यापन का एक और सत्र समाप्त हुआ. तो चलो पहले बात करतें हैं अपने परास्नातक अध्यापन की. जुलाई, 2016 से मई 2017 तक चले लगभग एक साल के इस सफ़र में हसीन पल ढेर सारे मिले, लेकिन चुनौतियाँ भी कमतर नहीं थीं. जापानी भाषा में मास्टर डिग्री की ये पढ़ाई का सफर बहुत ही चुनौतीपूर्ण रहा है. सबसे बड़ी चुनौती ये है कि आप ऐसे जगह खड़े हुए हैं कि जहाँ आपको नकारात्मक बातों पर कोई ध्यान नहीं देना है. इस चीज़ से जो पार पा पाए वही असली साधू कहलाये. तो परास्नातक के स्तर को भी बनाए रखना एक और चुनौती थी. जोकि खुद की समीक्षा करने पर शून्य का एहसास होता है. अध्यापकों की आशाओं पर भी खरा उतरना एक और चुनौती. ज्यदातर लोग इस क्षेत्र में तीन या चार साल के बाद अच्छी सी नौकरी करते हैं. लेकिन जब हमने आगे पढने का बीड़ा उठा ही लिया है तो चुनौतियों ये क्यूँ घबराना. हांलांकि स्वयं को …

स्वागत है आपका~! ようこそ~!

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मैं आदित्य कुमार चौधरी, आपका दोस्त कुछ अपने अनुभव और ज्ञान को पेश करने के लिये ये ब्लॉग की शुरुआत किया है. मेरा सपना एक अच्छे से जापनी अध्यापक के रूप में खुद को दिखाना है. ज्ञान हर तरीके से बाँट सकूँ इसिलए मैंने इस ब्लॉग का आज श्री गणेश किया है. मैं अभी जापनी भाषा के मास्टर डिग्री का छात्र हूँ. मैं अपना योगदान जापनी और हिंदी को एक साथ जोड़ने के साथ करना चाहता हूँ. हांलांकि इसपर काफी काम किये जा रहे हैं फिर भी वो नाकाफी से लगते हैं. मेरे इस ब्लॉग में जापनी और हिंदी का सम्मिश्रण देखने को मिलेगा. अनुवाद, मेरे जापनी भाषा के क्षेत्र में हुए नाना प्रकार के अनुभव, मेरे पाठ्यक्रम के सम्बंधित चीज़ें मतलब जापनी से सम्बंधित हर चीज़ वो भी केवल हिंदी में.

बस आप लोगों का साथ चाहिए.

योरोशीकुओनेगाईशिमासु!

आपका

आदित्य アディ